अब तो खाओ
ताक धिनाधिन ताल मिला लो हँसते जाओ गोरे-गोरे थाल-कटोरे लो चमकाओ। चकला-बेलन मिलकर बेले फूल फुलकिया अम्मां तेरी खूब फुलाओ। भैया आओ मीठी-मीठी अम्मां को भी यहां बुलाओ प्यारी अम्मां सबने खाया अब तो खाओ।
-देवेन्द्र कुमार (1940)
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