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बाबा
जी की छींक घर
- भर को
चौंकाने
वाली
बाबा जी की
छींक
निराली।।
लगता यहीं
कहीं बम
फूटा
या कि तोप
से गोला
छूटा
या छूटी
बन्दूक
दुनाली
बाबा जी की
छींक
निराली।।
सोया
बच्चा जगा
चौंक कर
झबरा
कुत्ता
भगा भौंक
कर
झन्ना उठी
कांस की
थाली
बाबा जी की
छींक
निराली।।
दिन में
दिल
दहलाने
वाली
गहरी नींद
हटाने
वाली
बाबा जी की
छींक
निराली।।
कभी कभी तो
हम डर जाते
भग कर
बिस्तर
में छिप
जाते
हँस कर कभी
बजाते
ताली
बाबा जी की
छींक
निराली।। -रमापति
शुक्ल
(1909)
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