बालगीत

 बादल प्यारे

बादल प्यारे 
बादल प्यारे
छाये नभ में 
हो कजरारे

कभी लाल पीले हो जाते
सारे नभ में दौड़ लगाते
काला भूरा रूप तुम्हारा
सबके मन को लगता प्यारा

एक जगह पर कभी न रुकते
करते काम कभी ना थकते 
जब सूरज गरमी फैलाता
सबको है पीड़ा पहुँचाता

ऊपर से 
उसको ढक लेते
परोपकार की 
शिक्षा देते।

-रामसागर यादव

 

संस्थापक व संपादकः डा जगदीश व्योम             वेब सहयोगः पूर्णिमा वर्मन


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