बंदर-मस्त कलंदर
बंदर-बंदर मस्त कलंदर क्यों बैठे हो डाली पर ? 'चलो उतरकर आओ अंदर काँप रहे हो तुम थर थर` बंदर बोला- अरे मुछंदर कभी न मैं आऊँ अंदर डम-डम-डमडम डमरू ले कर मुझे नचाओगे दिन भर।
-सूर्य कुमार पांडेय (1956)
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