बालगीत  

                                       घोड़ा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कसली कसली पीठ
कि घोड़ा टप टप टप टप
हिलती डुलती पूँछ
कि झाड़ू झप झप झप झप

खाता दाना घास
कि बोले हिन हिन हिन हिन
मेहनत उसका काम
कि करता हर दिन हर दिन

काठी कसी लगाम
एड़ दी हुर्रम हुर्रम
नौसिखिया असवार
कि मन में थर्रम थर्रम

बैठे सीना तान
कि चाबुक चप चप चप चप
सरपट घोड़ा चला
गिरे हम धप धप धप धप

-शिव गोविन्द त्रिपाठी

 

 

संस्थापक व संपादकः डा जगदीश व्योम             वेब सहयोगः पूर्णिमा वर्मन


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