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लाला
जी की तोंद
लाला जी
बड़ी तोंद
है
घंटाघर की
घड़ी तोंद
है
लाला जी से
मिलो बाद
में
उनसे पहले
खड़ी तोंद
है
कुरते में
घुसने से
पहले
रोज लड़ाई
लड़ी तोंद
है।
बस में
चढ़ते और
उतरते
दरवाज़े
में अड़ी
तोंद है।
किसी
अंगूठी
में ज्यों
हीरा
लाला जी
में जड़ी
तोंद है।
चूरन के
पर्वत के
नीचे
लाला जी की
बड़ी तोंद
है।
-सूर्यभानु
गुप्त
(1940)
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