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निम्मी
का परिवार निम्मी
का परिवार
निराला
कभी न होता
गड़बड़झाला
सबका अपना
काम बँटा
है
कूड़ करकट
अलग छंटा
है।
झाड़ू
देती
गिल्लो
मिल्लो
चूल्हा
चौका करती
बिल्लो
टीपू टामी
देते पहरा
नहीं एक भी
अंधा
बहरा।
चंचल
चुहिया
चाय बनाती
चिड़िया
नल से पानी
लाती
निम्मी जब
रेडियो
बजाती
मैना मीठे
बोल
सुनाती।
-कन्हैया
लाल 'मत्त`
(1911 - -2003)
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