बालगीत

 सच्चा दानी

पेड़ किसी से नहीं पूछता
कहो, कहाँ से आए ?
वह तो बस कर देता छाया
चाहे जो सुस्ताए!
खिलते समय न फूल सोचता
कौन उसे पाएगा?
उसकी खुशबू अपनी सांसों में
भर इतराएगा!
बादल से जब सहा न जाता
अपने जल का संचय
बस, वह बरस-बरस भर देता
नदियाँ, नहर, जलाशय!
जो स्वभाव से ही दाता है
उन्हें न कोई भ्रम है
भेदभाव करते हैं वे ही
जिनकी पूजा कम है।

-बालस्वरुप राही
(1936)

 

संस्थापक व संपादकः डा जगदीश व्योम             वेब सहयोगः पूर्णिमा वर्मन


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