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सूरज
मैं
हूँ सूरज
भोर का
दुश्मन
हूँ तम घोर
का।
रोज सबेरे
आता हूँ
अपना फर्ज
निभाता
हूँ
किरणों के
तीखे भाले
से
तम को मार
भगाता हूँ
कलियाँ
खिलतीं
फूल
बिहँसते
चिड़ी
चहकती शोर
का।
मैं हूँ
सूरज भोर
का।।
ठीक समय पर
पहुँचा
करता
नहीं
बहाना
करता हूँ
सर्दी-गर्मी
या वर्षा
हो
नहीं किसी
से डरता
हूँ
बर्फ गिरे,
आँधी आये
या
आये तूफां
जोर का।
मैं हूँ
सूरज भोर
का।।
बच्चो ! कभी
नहीं कम
होने
देना अपने
साहस को
और कभी मत
पास फटकने
देना अपने
आलस को
फिर मेरी
ही तरह
तुम्हारा
स्वागत
होगा जोर
का।
मैं हूँ
सूरज भोर
का।।
-डॉ०
दिनेश
पाठक 'शशि`
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