Aryabhatta mathematician biography आर्यभट facts Picture

दोस्तों क्या आप जानते हो भारत आज से ही नहीं बल्कि आदिकाल से ही वैज्ञानिको का गड़ रहा है, अगर वैज्ञानिको की बात की जाये तो भारत में प्रफुल्ल चन्द्र रॉय, सलीम अली, सि वि रमन, श्री निवास, कलाम साहब, राज रेड्डी तथा आर्यभट जेसे बहुत सारे प्रसिद्ध वैज्ञानिक भारत में हुए है| आज हम आदिकाल से प्रसिद्ध वैज्ञानिक आर्यभट के बारे में बात करेंगे जो Aryabhatta Mathematician नाम से भी जाने जाते है|

वेसे Aryabhata का सही जन्म स्थान अभी तक स्पस्ट नहीं हुआ है लेकिन ज्यादातर इतिहासकार उनका जन्म स्थान महाराष्ट्र के अश्मक देश में बताते है| वो अपनी ज्योतिष और गणितीय खोजो के लिए प्रसिद्ध हुए थे तथा उन्होंने अपनी ज्यादातर खोजे जेसे पाई का अन्वेषण, आर्यभटीय, आर्यभट सिद्धांत पटना में स्थित अपनी खोज शाला में ही की थी|

aryabhatta

Aryabhatta Biography

आर्यभट (४७६-५५०) ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे, जिन्होंने गणितज्ञ में बहुत सारी खोजे की थी | इन्होने ही आर्यभटीय ग्रंथ की रचना की थी जो ज्योतिष और गणित पर लिखी गये बड़े ग्रंथो मे से एक है| उन्होंने बहुत सारे नविन सिद्धांतों का प्रतिपादन भी किया था|

जन्म  दिसम्बर 476
मृत्यू दिसम्बर 550 (उम्र 74)
निवास भारत
जन्म स्थान अश्मक देश, महाराष्ट्र, भारत
संस्थाएँ  नालंदा विश्वविद्यालय
क्षेत्र प्राचीन गणितज्ञ, ज्योतिष्विद, खगोलज्ञ
प्रसिद्ध कार्य आर्यभटीय, पाई का अन्वेषण, आर्यभट सिद्धांत,

 

आर्यभट का जन्म-स्थान

Aryabhatta का  जन्म-स्थान आभी तक पक्का नहीं है क्योकि इसमें इतिहासकारों कोई एक राय नहीं है, कुछ इनको पच्चिम भारत तो कुछ इनको दक्षिण भारत के बताते है| माना जाता है उनका जन्म अश्मक देश में हुआ था लेकिन अभी तक अश्मक देश की सही स्थिति भी तय नहीं है,

कुछ अश्माका को गोदावरी और नर्मदा के मध्य स्थित क्षेत्र को बताते है, कुछ भारत के मध्य  महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश को मानते है और कुछ का मत है की जो अलेक्जेंडर से लड़े उनको अश्माका कहा गया| अता बौद्ध ग्रन्थ में इसे दक्षिण में बताया गया है|

इस विषय में अभी भी शोध हो रहे है, नवीनतम शोध में उनको चाम्रवत्तम (१०उत्तर५१, ७५पूर्व४५) का निवासी बताया गया है जो अभी केरल राज्य में स्थित है इसके अनुसार ये जैन समुदायिक क्षेत्र था जो श्रवणबेलगोल के आसपास फेला था, यहाँ पर पाए जाने वाले पत्थर के खम्बों के कारण इसका ये नाम पड़ा था|

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कृतियाँ

उन्होंने अपने जीवन काल में आर्यभट सिद्धांत, आर्यभटीय, पाई का अन्वेषण, जेसे महान ग्रन्थ लिखे थे, लेकिन काफी इतिहासकारों का ये भी मानना है की उन्होंने केवल एक  ‘आर्यभट सिद्धांत’ ही लिखा था | ये महान  ग्रन्थ अभी तक पूर्ण नहीं है, इतिहासकार अभी तक इसके  ३४ श्लोक ही जुटा पाए है, सातवे दसक में आर्यभट सिद्धांत का बहुत उपयोग हुआ था लेकिन ये भी स्पस्ट नहीं है की इतना बड़ा ग्रन्थ विलुप्त केसे हो गया|

ये आर्यभटीय जो एक ज्योतिष ग्रन्थ है उसकी भी रचना की थी, इसमें उन्होंने समान्तर श्रेणी वर्गमूल तथा घनमूल का वर्णन किया था | उनके द्वारा रचयित आर्यभटीय एक प्रमुख खगोल एवं गणित विज्ञान के उत्तम कृति है | पूर्वे में उनकी कृतियों के आधार पर बहुत सारे सिदांत प्रतिपादित हुए थे |

उन्होंने अपने ग्रन्थ के गणितीय भाग में सरल त्रिकोणमिति अंकगणित गोलीय त्रिकोणमिति और बीजगणित को व्यापक रूप से समझाया था|  वराहमिहिर जो समकालीन ग्रन्थ था के लेखनों से पता चला है की ज्यादातर आर्य-सिद्धांत अब विलुप्त हो चुके है, ये अभी तक एक रहस्य है की इतना महानग्रंथ केसे विलुप्त हुआ था|

आर्यभटीय में दिन गणना भी सूर्योदय पर नहीं की जाती थी उस समय ये मध्यरात्रि के आधार पर कि जाती थी| इस ग्रन्थ में उन्होंने बहुत सारे खगोलीय उपकरणों का भी जिक्र किया था| जिनमे प्रमुख वृत्ताकार (धनुर-यन्त्र / चक्र-यन्त्र),  बेलनाकार छड़ी यस्ती-यन्त्र, संभवतः कोण मापी उपकरण, नोमोन(शंकु-यन्त्र), एक परछाई यन्त्र (छाया-यन्त्र) और अर्धवृत्ताकार अड्डी थे |

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आर्यभटीय

आर्यभटीय एक Aryabhatta mathematician द्वारा रचयित प्रमुख ज्योतिष एवं गणितीय ग्रथ है, इसके कुछ ही श्लोक बचे है बाकि का सही पता नहीं है या लुप्त हो गए है| इसका नामकरण भी स्वयं आर्यभट्ट ने ही किया था, और इसकी जानकारी प्रथम ने अश्मकतंत्र में उनके शिष्य भास्कर ने किया था| इसमें ग्रंथ में १०८ छंद और १३  परिचयात्मक हैं| ये चार अध्यायों में है जिनके नाम निम्न है|

(1) गीतिकपाद : (१३ छंद)         – (1) Geetakpad: (13 verses)

(२) गणितपाद (३३ छंद)            – (2) Mathipad (33 verses)

(३) कालक्रियापाद (२५ छंद) :   – (3) Kalachiyad (25 verses):

(४) गोलपाद (५० छंद):             – (4) Goalpad (50 verses):

आर्यभट का योगदान

जिस समय Aryabhatta ने जो खोजे की वो वास्तव में उस समय बहुत ही क्रन्तिकारी और बहुत ही उपयोगी थी, उन्होंने अपने जीवन में बहुत सारी उपलब्धिया भी हासिल की थी, वो उस समय के विश्व के सबसे बड़े नालन्दा विश्वविद्यालय में कुलपति भी रहे थे, आपको बता दे उस समय नालन्दा विश्वविद्यालय पूरी दुनिया के लिए ज्ञान का मुक्य स्रोत था| उस समय यहाँ १०००० से अधिक विद्यार्थी पड़ते थे और उनके लिए २००० से अधिक शिक्षक भी थे |

Thing founded By Aryabhatta आर्यभट की खोजे

उन्होंने पाई के सही मान को भी बताया था| उन्होंने ही  पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है ये आर्यभट ने ही सबे पहले उदहारण के साथ समझाया था, और ये उस समय की बहुत बड़ी खोजो में से एक है | उन्होंने 120 आर्याछंदों में ज्योतिष शास्त्र के बहुत सारे सिद्धांतो का प्रतिपादन भी क्या0 था | उन्होंने नाव की पानी में गति के सिद्धांतो क० भी समझाया था, ये सब उस समय किया जब कोई उपयोगी सहायक उपकरण नहीं थे|

ग्रहण

उन्होंने ग्रहण को भी समझाया था, उन्होंने बताया की ग्रहण दुसरे ग्रहों चाँद आदि की छाया के कारण होते है, तथा ये भी बताया की ये सभी ग्रह सूर्य की चमक या प्रकाश से चमकते है या इन पर रोसनी होती है| उन्होंने ये भी बताया की प्रत्येक गृह दो गतियो से गतिमान है उनमे से एक  मंद ग्रहचक्र (धीमा) और एक बड़ा शीघ्र ग्रहचक्र (तेज)|

वर्ष दिन की गनणा

उन्होंने एक वर्ष में 365 दिन 6 घंटे 12 मिनट 30 सेकन्ड बताये थे जो बहुत सटीक है, उंकी और वर्तमान की गणना में केवल  3 मिनट और 20 का फर्क ही है जो बिना किसी आधुनिक उपकरणों की बिना बताई गयी थी|

अंतिम पक्तिया

आशा करते है आपको Aryabhatta biography पर लिखा गया ये लेख पसंद आएगा, अगर आपकी जानकारी में या कोई नविन शोध की आपको जानकारी है तो हमें जरुर बताये, हमने ब्लॉग के इस पोस्ट में जरुर शामिल| आशा करते ये लेख आपके लिए उपयोगी होगा|

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