Surah Fatiha in Hindi

Surah Fatiha in Hindi: आयतुल कुर्सी, भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा, दुनिया भर में मुस्लिम समुदायों द्वारा अधिकांशतः उपास्य मानी जाने वाली एक महत्वपूर्ण आयत है। इसके महत्व और विशेषता के कारण,

यह कुरान के सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली आयतों में से एक के रूप में जानी जाती है। आयतुल कुर्सी को सुरह बाकराह, आयत 255 में पाया जाता है। इसे “आयतुल कुर्सी” के नाम से प्रसिद्ध किया जाता है, जिसका अर्थ है “बैठने की कुर्सी की आयत”।

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Surah Fatiha in Hindi

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Surah Fatiha in Hindi

हम आयतुल कुर्सी के हिंदी अनुवाद को यहां प्रस्तुत कर रहे हैं:

“अल्लाह! वह एक है, जो सबकी पूजा के लायक है। जिसे न नींद आती है, न उसे थकान लगती है। जिसकी यहाँ सभी चीजें आसमानों और ज़मीन के बीच में हैं। कौन है जो उसके सामने शिफ़ात कर सके, बिना उसकी इजाजत के? वह जानता है जो लोगों के भीतर और उनके आसपास है। उनकी जान अपनी इबादत से भी ऊपर है, वह कुछ भी बिना उसकी इजाजत के नहीं कर सकते।

उसके सामने अरश तक़दीर देने के लिए है। वह सभी चीजों को जानता है, जो भूत, वर्तमान, और भविष्य में होती हैं। उसके ज्ञान के बिना कोई भी व्यक्ति उन चीजों को जानने के योग्य नहीं है। उसका अर्श बड़ा विस्तारशील है और उसके इबादत को वारंवार बदलने वाले हैं। वह इबादत के वक्त सामर्थ्यवान है और उसे इबादत के वक्त भी कोई आश्रय नहीं है। वह आकाश और पृथ्वी के बीच बसा है। उसके इबादत को ना थकने वाली है, न नींद आने वाली है। उसी की है जो सब कुछ है।”

यह आयत कुरान में सबसे लंबी आयत है और अल्लाह की बड़ी शानदार सिफारिश के साथ प्रस्तुत की गई है। इसे खुदा के अद्भुत गुणों और शक्तिशाली स्वरूप का अभिवादन करने के लिए विशेष रूप से चुना गया है। यह आयत अल्लाह के महत्वपूर्ण गुणों के विस्तृत सारांश के रूप में मानी जाती है, और इसका पाठ एक विशेष विधि है जिससे व्यक्ति को मानसिक और आत्मिक शक्ति मिलती है। आइए, हम अब आयतुल कुर्सी के बारे में और विस्तार से जानते हैं:

१. कुरान का सबसे लंबा आयत

आयतुल कुर्सी को कुरान में सबसे लंबा आयत माना जाता है। इसमें २५५ शब्द होते हैं, जो एक संयुक्त अवधि में इसे पढ़ने का काम करते हैं। इसका पाठ अलग अलग रूपों में किया जाता है, जैसे कि नमाज़ के बाद अलग समय पर या भयानक परिस्थितियों में। इसे पढ़ने से व्यक्ति को मानसिक और आत्मिक शक्ति मिलती है।

२. अल्लाह के गुणों की महिमा

आयतुल कुर्सी में अल्लाह के गुणों की महिमा बताई गई है। इसमें अल्लाह को सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी, ज्ञानी, अनंत, और सर्वव्यापी बताया गया है। इससे यह प्रतिदिन की ज़िन्दगी में एक उपलब्धि और सफलता की प्राप्ति के लिए प्रेरित करता है।

३. भयानक परिस्थितियों में रक्षा

आयतुल कुर्सी को भयानक परिस्थितियों में रक्षा के लिए जाना जाता है। इसका पाठ करने से व्यक्ति को भय का सामना करने की क्षमता मिलती है और उसे अल्लाह की रक्षा मिलती है।

४. नफ़रत के भाव को दूर करने में सहायक

आयतुल कुर्सी को नफ़रत के भाव को दूर करने में भी सहायक माना जाता है। इसके पाठ से व्यक्ति के मन में आनंद और शांति की भावना उत्पन्न होती है और उसके मन में प्रेम की भावना उत्पन्न होती है।

५. आत्मिक विकास का अच्छा साधन

आयतुल कुर्सी को आत्मिक विकास का एक अच्छा साधन माना जाता है। इसके पाठ से व्यक्ति को आत्मिक विकास होता है और उसकी दुआएं प्राप्ति होती हैं।

६. शैतान से रक्षा

आयतुल कुर्सी को शैतान से रक्षा करने के लिए एक शक्तिशाली साधन माना जाता है। इसके पाठ से व्यक्ति को शैतान से बचने की क्षमता मिलती है और उसे अल्लाह की सहायता मिलती है।

७. अन्य लाभ

आयतुल कुर्सी के पाठ से व्यक्ति को विभिन्न आर्थिक, सामाजिक, और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं। इससे व्यक्ति को सुख, शांति, और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

सूरह फातिहा को कौन सी सूरह के रूप में जाना जाता है?

सूरह फातिहा को कुरान की पहली सूरह के रूप में जाना जाता है।

सूरह फातिहा का अरबी में क्या नाम है?

सूरह फातिहा का अरबी में नाम “الفاتحة” है।

सूरह फातिहा की कुल कितनी आयतें हैं?

सूरह फातिहा में कुल 7 आयतें हैं।

सूरह फातिहा किस मक्की और मदीनी सूरह में से है?

सूरह फातिहा को मक्की सूरह में स्थान प्राप्त है।

सूरह फातिहा को किसे पढ़ना चाहिए?

सूरह फातिहा को हर मुस्लिम व्यक्ति को नमाज़ के दौरान हर रकअत में पढ़ना चाहिए।

सूरह फातिहा के पढ़ने से क्या लाभ होता है?

सूरह फातिहा को पढ़ने से व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मकता, और आत्मिक विकास का अनुभव होता है।

सूरह फातिहा को कैसे समझा जा सकता है?

सूरह फातिहा को अर्थ सहित अरबी भाषा में पढ़कर और उसके अर्थ को समझकर हम इसका महत्व समझ सकते हैं।

सूरह फातिहा को कब और कहां पढ़ना चाहिए?

सूरह फातिहा को हर नमाज़ के दौरान पढ़ना चाहिए, इसे किसी भी स्थान पर पढ़ सकते हैं, लेकिन व्यक्ति को शुद्ध रखना चाहिए।

सूरह फातिहा को पढ़ने से किसे आराम मिलता है?

सूरह फातिहा को पढ़ने से व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक आराम मिलता है।

सूरह फातिहा का अर्थ हिंदी में क्या है?

सूरह फातिहा का अर्थ हिंदी में “खुलासा” या “विवेचना” होता है।

सूरह फातिहा का मुख्य उद्देश्य क्या है?

सूरह फातिहा का मुख्य उद्देश्य अल्लाह की प्रशंसा और अराधना करना है।

सूरह फातिहा के पठन के बाद क्या दुआ मांगी जाती है?

सूरह फातिहा के पठन के बाद अल्लाह से हमेशा अपने अच्छे कर्मों की सजा और बुरे कर्मों से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है।

सूरह फातिहा का पठन किस नमाज़ में अनिवार्य होता है?

सूरह फातिहा का पठन हर नमाज़ की प्रत्येक रकअत में अनिवार्य होता है।

सूरह फातिहा में कौन-से गुणों की प्रशंसा की गई है?

सूरह फातिहा में अल्लाह की अमूल्य गुणों, उसकी कृपा, दया, और रहमत की प्रशंसा की गई है।

सूरह फातिहा को कैसे पढ़ना चाहिए?

सूरह फातिहा को खड़े होकर और ध्यान से पढ़ना चाहिए, इसे जल्दी बिना विचार किए बिना नहीं पढ़ना चाहिए।

सूरह फातिहा का पठन कब और कैसे शुरू हुआ?

सूरह फातिहा का पठन ईस्लामी नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के दौरान शुरू हुआ था, और उन्हें खुदा ने पढ़ने के लिए उसे सीधे वही दिया था।

सूरह फातिहा को किस तरह पढ़ना चाहिए?

सूरह फातिहा को खड़े होकर, ख़ामोशी से, और ध्यान से पढ़ना चाहिए।

सूरह फातिहा के पढ़ने से क्या लाभ होता है?

सूरह फातिहा के पढ़ने से व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक आराम मिलता है।

सूरह फातिहा को किस तरह पढ़ना चाहिए?

सूरह फातिहा को खड़े होकर और ध्यान से पढ़ना चाहिए, इसे जल्दी बिना विचार किए बिना नहीं पढ़ना चाहिए।

सूरह फातिहा की पढ़ाई कब और कैसे शुरू हुई?

सूरह फातिहा की पढ़ाई ईस्लामी नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के दौरान शुरू हुई थी और उन्हें खुदा ने पढ़ने के लिए उसे सीधे वही दिया था।

अंतिम पक्तियाँ

क़ुरान के विभिन्न सूरों में कई महत्वपूर्ण और शक्तिशाली आयतें हैं, और इनमें से एक है आयतुल कुर्सी। यह आयत अल्लाह के अद्भुत गुणों की महिमा का संक्षेपवार रूप है, और इसे पढ़ने से व्यक्ति को मानसिक और आत्मिक शक्ति मिलती है।

इसका पाठ करने से व्यक्ति का मन शांत होता है और उसे आध्यात्मिक विकास की प्राप्ति होती है। इसलिए, हर मुस्लिम को आयतुल कुर्सी का पाठ अवश्य करना चाहिए और इसे अपने जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि की प्राप्ति के लिए अपनाना चाहिए।

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